गाँव जहां लोग एक - एक पैसे की कीमत जानते है इसलिए वह खेतो मे फसल काटने के बाद एक बार जरूर टूटी हुई फसल की बालियाँ को समेटा करते है जिस से अन्न का एक भी दाना बर्बाद न हो सके क्युकि वह अन्न की वह शक्ति जिससे अन्न अनेक दानो मे और भरे - पूरे पढ़ मे तब्दील होता है को भलीभांति जानता है वह यह भी जानता है की अन्न के एक दाने से भी किसी की भूख शांत हो सकती है ׀ हिन्दू धर्म मे श्री कृष्ण भगवन ने महाभारत मे एक प्रसंग मे द्रोपदी से खीर की खाली हंडिया मे से निकले चावल के एक दाने से अपना तथा आगन्तुक अथितियों को भी पेट भर लिया यदि आप भी किसी गाँव से झूड़े हुए तो आपने जरूर ऐसा देखा होगा ׀
अन्न का ऐशा सम्मान गाँव और भारत वर्ष के अलावा शायद दुनिया मे कंही होता हो शहरो मे अब भी कुछ लोग अन्न को वैशा ही सम्मान देते है जैसा गाँव मे दिया जाता है ׀ भारत देश अपने संसाधनों को बहुत ही उतम ढंग से इस्तेमाल करने वाले लोगो का देश था, है और शायद रहेगा ׀ इस अभिलाषा के साथ मे ये बात कहती हूँ की हमे अपनी सोच और विचार उस लोक कल्याणकारी विश्व गाँव के प्रति प्रेरित करती है ׀ जिसमे शहरो से लोग गाँव की और आयेगें क्युकि उनको वो तरक्की नहीं चाहिए जो आज कल के शहर या विदेशो के शहरो की नक़ल के शहर देते है ׀ बल्कि उनको वो स्वस्थ तन - मन और दिमाग देगा जिससे वो विश्व की सेवा कर सके और ईश्वर के दिए प्राकर्तिक संसाधनों का समुचित और संतुलित उपयोग कर मानव कल्याण की राह बना सके ׀ गाँव जहां आज भी अस्पताल नहीं बल्कि कहीं कहीं तो कोशो दूर तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा भी नहीं है ׀ शिक्षा के नाम पर केवल प्राथमिक विद्यालय है वो भी एक या दो शिक्षको वाले, पीने का पानी तो सरकार ने नदियों पर बाँध बना कर शहरो के नाम कर दिया ׀ उन्हें अब भी अपनी जरूरतों के लिए किसी तालाब या बावडी पर निर्भर रहना पड़ता है ׀ हां एक बात जरूर है वो है प्रकाश की प्राक्रतिक व्यवस्था सरकार की बिजली तो अभी तक शहरो मे भी चली जाती है तो गांवो तक पहुचने मे तो अभी वक़्त लगेगा ׀
गाँव का ये रूप देखकर कहीं आप डर तो नहीं रहे है क्युकि ये रूप तो शहर वालो ने बनाया है लकिन गाँव आज भी उस कुदरत की सबसे सुन्दर रचना है जिसमे नर तो क्या पशु ,पक्षी और कीडे - मकोडे सब का जीवन सुरक्षित है सबको अपने हिस्से का भोजन - पानी बराबर मिलता है ׀ कभी कोई बीमार नहीं होता और यदि होता भी है तो प्राक्रतिक उपचार के द्वारा तुंरत ठीक भी हो जाता है ׀ जहां आज भी लोग अपने घरो मे आये हुए अजनबी को भी भोजन कराना नहीं भूलते चाहे स्वयम भूखा रहना पड़े ׀ किसी को कोई दुःख हो अथवा सुख सभी अपनी - अपनी तरह से मदद करने का पूरा प्रयत्न करते है ׀

आज दुनिया मे जारी मंदी से भारत को किसी ने बचा रखा है तो वो ग्रामीण प्रव्रति ही है जिससे देश कभी भी आने वाले बाढ़ ,सुखा , भूकंप जैसी प्रक्रतिक और रेल पलटने पर ,जहाज गिरने पर अथवा देश पर किसी भी तरह के आक्रमण के समय सबसे पहले ये ग्रामीण ही लोहा लेते दिखाई देते है ׀ क्या शहर मे रहने वाले ऐशा करते है ?
गाँव के विषय मे आप लोगो से आपके विचार आमंत्रित करती हूँ
किसान को राम राम और अन्य देश वाशियों वशुधेव को भी राम राम कह दीजिये बबिता जी वैसे आपके लिखने का अंदाज काफी सुन्दर है और आपका चुना हुआ चरित्र भी आपको बहुत बहुत बधाई आपके पहले लेख पर ब्लॉग की दुनिया मै
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