Wednesday, October 6, 2010

वो है किसान











दुनिया मे कोई ईश्वर का सबसे बड़ा भक्त है तो वो है
किसान
दुनिया मे यदि कोई ईश्वर को प्रिय है तो वो है
किसान
दुनिया मे यदि कोई सबसे अधिक सुखी या फिर दुखी है तो वो भी है
किसान



आप सोचते होंगे की मे किस तरह की बात कर रही हूँ


गाँव मे आती है मिट्टी की खुसबू जो जीवन है हर मानवता का आप को क्या
क्या बताऊ गाँव के बारे मे आप स्वयम अपने परिवार की किसी ऐशी पीढी से
पूछे जो गाँव मे रही है वो भी शायद कहे की शब्द नहीं है होने के पास वो
अनुभव बयान करने के लिए लकिन उनके चहरे पर आई ख़ुशी से आप केवल अंदाजा भर
लगा सकते हो लेकिन उसे जब तक जियोगे नहीं तब तक आपको उस मिठास के विषय मे
बताना अतिशोय्क्ति जैसा लगेगा और ये गलत भी नहीं है गाँव जहाँ व्यक्ति
नहीं रहता और न ही रहते है आज कल का परिवार (माँ, पिता और उनके बच्चे )
वहाँ है तो परिवार अपने पूरे रूप रंग मे जिसमे लगभग सभी रिश्ते - नाते
माता -पिता ,दादा -दादी ,चाचा -चाची,ताऊ- ताई, बहन - भाई अथवा कुटुंब
(कुनबा) जिसमे कुछ गाँव तो केवल एक ही वंश का होता है और पूरे गाँव के
लड़के -लड़कियों के बीच कोई न कोई रिश्ता - नाता होता है और उसे वो पूरी
ईमानदारी से निभाते है



गाँव कोई पिछड़ा हुआ सामाज नहीं है बल्कि वो तो अपने आप मे पूरी तरह
आत्मनिर्भर सामाज है और वो अक्सर उन लोगो के लिए भी सेवा भावः से कार्य
करता है जो शहर मे रहते है उसे उनसे कोई डर नहीं है बल्कि उसको वो अपने
भाई के समान जीवन भर अन्न का प्रसाद देता है और इसे अपना पहला कर्तव्य
समझता है


Wednesday, April 14, 2010

पंच परमेश्वर



पंचायते
मानव आरम्भ मे अकेला हो ये संभव नहीं हो सकता क्योकि मानव की उत्पति का मूल नियम सभी को पता है ये जरूर है की आरम्भ मे मानव की संख्या दो से लेकर दहाई या सेकडो हो उनमे कुछ कमजोर होंगे कुछ ताकतवर लेकिन अन्य पशु - पक्षियों से बचाव के लिए, सबसे महत्वपूर्ण जीवन के लिए उन्होंने कुछ नियम कायदे बनाये जो पीढ़ी दर पीढ़ी बदलते रहे

आज हम कानून का जो रूप देखते है वो मानव को मानव अधिकार प्रधान करता है लेकिन समय के साथ कुछ मानव समूह अपनी स्वार्थसिद्दी पूरी करने के लिए कानून के रखवाले बन बेठे है जैसे पंच, न्यायधिश, मौलवी अन्य

आज सभी को पता है की यदि आप अदालत मे अपने पक्ष को रखने के लिए जायेंगे तो वहां अदालत को कुछ खर्चे अदा करने होंगे जो हर याचक नहीं कर सकता साथ ही अदालतों मे लगने वाला वक़्त किसी भी निरपराधी को अपराधी की तरह ही भुगतना पड़ता है रही सही कमी अदालतों और सभी सरकारी, गैर सरकारी विभागों मे फैला भ्रस्टाचार पूरी कर देता है अब इंसाफ कहाँ मिले इस खोज का अंत यहीं तो नहीं

पंच (पंचायते) हर घर, परिवार, कुटुंब, समाज अपने बीच मे से कुछ सामाजिक लोगो को इस बात का अधिकार देते है की वो उनके (विवादित) फैसले करे एक दो इंसान किसी का पक्षपात कर सकता है इसलिए वो कम से कम पांच लोगो को ये अधिकार देते है जिससे उनका वक़्त और धन दोनों बच जाते है

जिस प्रकार अदालते झूठे गवाह और नकली सबूतों के आधार पर निरपराध को सजा दे देती है उसी प्रकार कभी इन पंचो से भी गलत फैसले ही जाते हो लेकिन इन्हें नकारा नहीं जा सकता

आजकल इस तरह की पंचायतो पर कुछ आरोप लग रहे जिनमे प्रमुख गोत्र विवाद है
किसी भी गाँव मे अक्सर ये माना जाता है की सभी लड़के लड़की एक दुश्रे को भाई बहन की नज़र से देखगे लेकिन फ़िल्मी चकाचोंध मे कुछ युवा भ्रमित होकर इस रिश्ते को दागदार कर रहे है आप ही सोचे यदि आपके घर आने वाला कोई लड़का या लड़की एक दिन चुपचाप एक दुश्रे के हो जाए या शारीरिक सम्बन्ध बना ले तब कैसा लगेगा ?
इस तरह के कुछ बच्चे अपने जिद और स्वार्थ को पूरा करने के लिए पंचायतो पर आरोप लगा रहे है कुछ माता पिता जिनकी वो इकलोती संतान हो अथवा किसी से जाति दुश्मनी निकालने के लिए भी इस तरह के अपराध मे अपने बच्चो का साथ दे देते है

अंत मे मै केवल इतना ही कहना चाहूंगी की समाज और सरकार दोनों को ही एक दुश्रे की जरूरत है बल्कि समाज या सरकार लोगो के विश्वाश पर ही कायम है यदि एक बार समाज का भरोशा कानून पर से उठ गया तो ........................................?